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नव रात्रा कैसे करते है

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नव रात्रा कैसे करते है ! आज उसकी पूरी जानकारी प्राप्त करेंगें जैसे की आज नव रात्रा है ! इसलिए आज ही नव रात्रा का पहला दिन है ! हमारे हिंदू धर्म में यह देखने को मिलता है ! नव रात्रा हर एक घर में नव रात्रा के दिन दुर्गा माँ की पूजा होती है ! नव रात्रा के दिन घर -घर में कोई ना कोई आदमी व्रत -उपवास रखता है ! वो भी माँ दुर्गा की पूजा के लिए जिससे माँ उस पर कृपा करे !

क्या -क्या बाते का ध्यान रखना चाहिए नव रात्रा के दिन -
नव रात्रा के दिन जो भी भी बाते ध्यान में रखनी होती है ! वह तो एक दम सीधी ही बाते है एक सीधी सी बात यह है ! की अपना आचरण सही रहना चाहिए ! सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर लेवे और इस नवरात्रा करने वालो को झूठ नहीं बोलना चाहिए और दूसरे को कोई प्रकार से पीड़ा नहीं पहुंचानी चाहिए ! व समय व शुभ मुहर्त का भी ध्यान रखना चाहिए जिससे की पूजा सही समय पर शुरू हो सके नव रात्रा की स्थापना कैसे की जाये उसके लिए जिस कमरे में नव रात्रा की स्थापना की जा रही है ! उस कमरे को पहले अच्छी तरह से साफ कर ले या कमरे की सफाई कर ले और किस दिशा में स्थापित किया जाये उसके लिए तो यह तो हर साल बदलते रहते है ! और तारों के अनुसार ही पूर्व दिशा या  पश्चिम दिशा में करे  उसी की अनुसार की दिशा का पता चलता है ! और शुभ मुहर्त भी ऐसे ही बदलता रहता है ! वो भी समय आने पर पता चल जाता है !
                                                               
seo sharmaplus , ramesh kumar

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कोनसे दिन किस माता की पूजा होती है -
नव रात्रा में ९  दिन तक ९ देवी माताओं की पूजा होती है जो की निम्न प्रकार से है -
पहले दिन जिस माता की पूजा होती है वह है शैल पुत्री अथार्त पहले दिन शैल पुत्री नामक माता की पूजा होती है !
दूसरे दिन जिस माता की पूजा होती है वह है ब्रहा चारणी अथार्त दूसरे दिन ब्रहा चारणी नामक माता की पूजा होती है !
तीसरे दिन जिस माता की पूजा होती है वह है चन्द्र घंटा अथार्त तीसरे दिन चन्द्र घंटा नामक देवी की पूजा होती है !
चौथे दिन जिस माता की पूजा होती है वह है कुष्मांडा अथार्त चौथे दिन  कुष्मांडा नामक माता की पूजा होती है !
पाँचवे दिन जिस माता की पूजा होती है वह है स्कन्द अथार्त पाँचवे दिन स्कन्द नामक माता की पूजा होती है !
छटवें दिन जिस माता की पूजा होती है वह है कात्यायनी अथार्त छटवें दिन कात्यायनी नामक माता की पूजा होती है !
सातवें दिन जिस माता की पूजा होती है वह है काल रात्री अथार्त सातवें दिन काल रात्री नामक माता की पूजा होती है !
आठवें दिन जिस माता की पूजा होती है वह है महा गौरी  अथार्त आठवें दिन  महा गौरी नामक माता की पूजा होती है !
नवें दिन जिस माता की पूजा होती है वह है  सिद्धिदात्री अथार्त नवे दिन सिद्धिदात्री नामक माता की पूजा होती है ! 
नव रात्रा या दीपावली के दिन किसी भी शुभ अवसर पर घर में तुलसी जी  का पेड़ लगाना चाहिए ! और उसके पास प्रति दिन सांय काल घी का दीपक जलना चाहिए ऐसा करने पर घर में सुख शांति बनी रहेंगी अथवा प्रभावित दंपति से भी सुख शांति बनी रहेंगी ! 
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नव रात्रा के दिन घर में माता का दरबार सजाया जाता है और माता का घट को स्थापित किया 

जाता है ! माता के पास  जौ - ज्वारे उगाए जाते है जिसको रोज पानी से सींचा जाता है ! माता के 

दरबार में ९ दिन - रात तक अखंड दीपक जलाया जाता है ! और दूसरा दीपक माता के सामने जोत 
लेने के लिए जलाया जाता है ! प्रति दिन सुबह जल्दी से उठकर स्नान आदि करने के बाद माता की 
पूजा - पाठ करके माता की जोत ली जाती है ! जिसमे माता को भोग लगाया जाता है ! 

कोनसे दिन किस माता को भोग लगते है तथा भोग में क्या लगते है उसकी जानकारी निम्न प्रकार से है -

पहले दिन जिस माता  को घी का भोग लगाया जाता है !
दूसरे दिन जिस माता को शक्कर का भोग लगाया जाता है ! 
तीसरे दिन जिस माता को दुध का भोग लगाया जाता है !
चौथे दिन जिस माता को माल पुआ का भोग लगाया जाता है ! 
पाँचवे दिन जिस माता को केला का भोग लगाया जाता है ! 
छटवें दिन जिस माता को शहद का भोग लगाया जाता है ! 
सातवें दिन जिस माता को गुड़ का भोग लगाया जाता है ! 
आठवें दिन जिस माता को नारियल का भोग लगाया जाता है 
नवें दिन जिस माता  को काले तिल का भोग लगाया जाता है ! 
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                              नव रात्रा में उपवास करने वाले क्या -क्या खाए  - 
नव रात्रा में बहुत से लोग व्रत - उपवास आदि करते है ! और माता के भक्त होते है वो भी नव रात्रा में व्रत उपवास करते है सम्पूर्ण नव रात्रा निराहार रहकर या फिर ऐसा ना हो तो अन्न का छोड़कर करना कई लोग तो पहले और अन्तिम दिन निराहार रहकर भी करते है ! नव रात्रा में एक समय भोजन कर और बाकि समय में दुध फल आदि खा कर भी उपवास रख सकते है ! और वह मिठाई भी ले सकते है जिसमे अन्न ना हो वह मिठाई तो बाजार से लाते है ! उसकी अपेक्षा तो अपने घर पर ही बनाकर ले लेवे ! क्योकि घर से बनी मिठाई में अन्न का मिलावटी  नहीं होगी  और शुद्ता भी अच्छी रहेंगी !  अब यह बताने की आपकी बारी है की यह पोस्ट कैंसी लगी और अच्छी लगे तो पोस्ट को शेयर करे ! और यदि आपके  मन में कोई सवाल हो तो कोमेन्ट भी करे ! 



अथ श्री मणि कथा

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आज की हमारी पोस्ट है ! अथ श्री मणि कथा  इस पोस्ट को को लिखने के लिए हमारे बहुत से दोस्त है जो की हमें यह कहा की अथ श्री मणि कथा  के बारे में पोस्ट जरुर करे और लेकिन इससे पहले मै वृहस्पति वार व्रत कथा और वृहस्पति देव की कहानी पहले से शेयर कर चूका हूँ ! और आगे हम अथ श्री मणि कथा  के बारे में पोस्ट कर रहे है जो नीचे दी हुई है 
                           
seo sharmaplus ramesh kumar



हमारे हिंदू धर्म के शास्त्रों में बहुत सी कहानीयां है ! और बहुत सी कथायें है ! इसको जब कोई पढता है या सुनता है ! उसे बड़ा ही आनंद आता है ! क्योकि ये कथाएं बहुत ही अच्छी लगने वाली है ! और इसमे ज्ञान का भंडार भी है और अपने देवताओ की याद भी है तो इस कथा को तो जरूर ही पढ़ना चाहिए ! एक तरफ से तो ज्ञान भी मिलता है और दूसरी तरफ से भगवान की भक्ति भी होती है यह तो मनुष्य को सच्चे तन मन से ही करना चाहिए तब ही भगवान की क्रपा होगी !

हमारे हिंदू धर्म के शास्त्रों के अनुसार भाद्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथी को चौथ का चाँद देखना निषेध  है ! क्योकि ऐसा माना जाता है ! की चौथ का चाँद देखने से झूठा कलंक लग जाता है ! और यदि कोई कारण वश से या फिर कोई अनजाने में भी चौथ का चाँद देख लेता है तो भी उसे झूठा कलंक लग जाता है ! तो इस दोष को शांत करने के या उसके कलंक को समाप्त करने के लिए अथ श्री मणि कथा सुननी चाहिए उससे ही उसका दोष दूर होगा ! वह कथा इस पोस्ट में है उसे पढकर कथा के बारे में जानकारी कर लेवे !

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                                               ''अथ श्री मणि कथा ''

एक समय की बात है ! की जब एक बार भगवान श्री कृष्ण जी अपने मित्र बाल - ग्वालो के साथ एक सभा कर रहे थे ! उस सभा को चलते ही थोड़ी ही देर में सत्तहा  जीत उस सभा के बीच आ पहुचे  वे मणि पहने हुए थे ! तब बाल - ग्वाल बोले की हमारी सभा के बीच आज तो सूर्य भगवान भी आ रहे है ! तब श्री कृष्ण जी बोले की ये सूर्य भगवान नहीं है ये तो चाचा सत्तहा  जीत है ! ये चाचा तो मणि पहन कर आये है !

इस बात पर ग्वालों ने कहा की यह मणि तो श्री  कृष्ण जी के नाना उग्र सेन महाराज को सोभा दे ! जो की मथूरा के राजा है ! ऐसी बात पर सत्तहा  जीत चुपचाप उस सभा से उठकर अपने घर चले गए ! और घर पहुँच कर यह बार अपने बड़े भाई प्रशन  को कहा की आज श्री कृष्ण जी मुझसे मणि मांग रहे थे ! तब उसके बड़े भाई प्रशन ने कहा की श्री कृष्ण जी आपसे मणि मांग रहे है ! तो आप मणि मुझे दे दे ! नहीं तो आपके पास श्री कृष्ण जी मांग लेंगे ! तो बड़े भाई प्रशन ने मणि पहन कर कहीं दूर जंगल में चला गया ! वहाँ कोई शेर प्रशन को मारकर उससे मणि छीन लिया ! आगे कोई जामवंत नाम का रीछ उस शेर को मारकर उस शेर से मणि छीन ली और मणि को ले जाकर अपनी बेटी जामवंती के पालने में टांग दिया !

उधर सत्तहा  जीत अपने भाई को गायब देखकर अपने घर वालो से कहां की श्री कृष्ण जी उससे मणि मांग रहे थे ! शायद श्री कृष्ण जी प्रशन को मारकर मणि ले लिया होगा ! यह बात घर से फैलती बाहर भी फ़ैल गयी और धीरे - धीरे श्री कृष्ण जी की पटरानीयों तक फ़ैल गयी ! तो राधा रानी और रुक्मणि ने श्री कृष्ण जी से कहा की आपने भाद्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथी को चौथ का चाँद देख लिया है ! जिससे आपको झूठा कलंक लग गया है ! इस पर श्री कृष्ण जी ने कहा की मै मणि को खोज कर झूठा कलंक को हटाऊंगा !

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ऐसा कहकर श्री कृष्ण जी मणि की खोज करने के लिए जंगल में चले गए ! वहाँ खोजते -खोजते वे देखा की मणि एक रीछ की गुफा में रीछ की लड़की जामवंती के पालने में थी ! श्री कृष्ण जी ने मणि लेना चाहा तो वह जामवंत नाम का रीछ उसके साथ विरोध करने लगा ! इस बात पर दोने में युद्ध छिड़ गया और एक माह तक दोनों में युद्ध होता रहा इस पर श्री कृष्ण जी ने कहा की मेरे सामने कोई एक दिन तक युद्ध नहीं कर सकता और रीछ ने भी कहा की मेरे सामने कोई एक दिन भी युद्ध नहीं कर सकता और रीछ ने कहा की आप कोन हो तब श्री कृष्ण जी ने अपना चतुर्भुज रूप दिखाया !

श्री कृष्ण जी का रूप देखकर रीछ ने श्री कृष्ण जी से  क्षमा याचना की तथा रामावतार वाली बात दोहराई की राम में जामवंत को अगले जन्म में मिलने का वादा किया था ! और जामवंत कहने लगा की मैंने अपने स्वामी के साथ युद्ध करके बड़ा पाप किया है ! इस लिए श्री कृष्ण जी के साथ अपनी पुत्री का विवाह कर दिया और देहज में उसे मणि दे दी !

श्री कृष्ण जी अपने घर आ गए और वह मणि सत्तहा  जीत को दे दी ! इस पर सत्तहा  जीत को अपनी गलती का अहसास हुआ ! की मैंने श्री कृष्ण जी को झूठा कलंक लगाया है ! तो सत्तहा  जीत ने अपनी पुत्री सत भामा का विवाह श्री कृष्ण जी से कर दिया और वह मणि श्री कृष्ण जी को देहज में दे दिया ! और जो इस कथा को पढता है ! और सुनता है और सुनाता है ! उसको भाद्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथी को चौथ का चाँद को देखने से कोई दोष नहीं लगता है ! इस लिए जिसने भी भाद्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथी को चौथ का चाँद को देखा है उसे अवश्य ही यह कथा करनी चाहिए !                                 समाप्त

इस कथा में बताया गया है की भाद्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथी को चौथ का चाँद के दर्शन से झूठा कलंक लग जाता है ! ऐसा इस कथा में भगवान श्री कृष्ण जी के साथ हुआ है और अंत में भगवान श्री कृष्ण जी ने मणि की खोज लगाकर सचाई दिखाई है ! सत्तहा  जीत जी ने श्री कृष्ण जी पर झूठा कलंक लगाया है ! फिर खुद को ही अपनी गलती माननी पड़ी और कथा में बताया प्रशन जी को सिंह ने मार डाला और सिंह को मारकर जामवंत नामक रीछ ने मणि ले ली ! और रीछ भी अपने स्वामी को पहचान नहीं पाया और युद्ध करता रहा और अंत में मणि श्री कृष्ण जी भगवान को दे दिया क्योकि रीछ का कुछ वादा भी था ! और इस पर भी पक्का था की उसको जीत कर ही मणि ले जा सकते है ! तो वह अक्कल से काम ले कर श्री कृष्ण जी का विवाह अपनी पुत्री से कर दिया और मणि भी ऐसे ही दे दिया की युद्ध में ना तो कोई की हार और ना ही कोई की जीत हुई श्री कृष्ण जी ने मणि सत्तहा  जीत को दे दिया ! आखिर सतरह जीत ने भी वह मणि श्री कृष्ण जी भगवान की ही दिया !

यह पोस्ट कैसी लगी यह बताने की अब आपकी बारी है और अच्छी लगी तो इसे शेयर करे और आपके मन जो भी सवाल इस पोस्ट के संबंध में आता है तो वो हमें कोमेंट करके बताये !



मकानों की नीव पूजन सामग्री सूची

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जब कोई आदमी नया मकानों का निर्माण करता है ! तो उसके हिसाब से यह होता है की पहले जिस मकानों में रहता था ! वह मकान पुराना हो गया या फिर अन्य और कोई आवश्यकता के लिए नये मकान बनाने की जरूरत हो गई वैसे भी तो मनुष्य एक समाजिक प्राणी है ! उसे रोटी कपड़ा और मकान की आवश्यकता होती है ! और पुराने मकानों की रिपेरिंग भी करते है तो उसके लिए तो यह नीव लगाने की जरूरत नहीं होती है क्योकि वो पहले से ही उसकी नीव लगी होती है ! हो सकता है की पहले भी नीव का पूजन किया हुआ हो ! और फिर भी नए सिरे से कोई मकानों का निर्माण करता है ! तो उसके लिए शास्त्रों के अनुसार नीव लगाने के दिन उसका पूजन भी किया जाता है उस मकानों के पूजन करने के लिए क्या -क्या पूजन सामग्री की आवश्यकता होती है ! आज जैसे मै काफी लोगो की सहायता कर रह हूँ ! ऐसे आज की तरह सदा ही सहयता करता रहूँगा  उसके बारे में यह पोस्ट किया हूँ !

आज हम जानेगे की मकानों की नीव पूजन सामग्री सूची की आवश्यकता होती है ! तो उसके लिए हमारे काफी दोस्तों ने यह पोस्ट शेयर करने के लिए हमें कहा तो इस लिए मैं आज यह पोस्ट कर रहा हूँ ! जो की बहुत से लोगो के लिए उपयोगी है !   उसकी जानकारी प्राप्त करेगें !  उससे पहले रामायण पाठ सामग्रीसूची , व  फेरे का सामान सामग्री सूची और अन्य सामग्री सूची (Samgri Suchi) की जानकारी शेयर कर चूका हूँ ! यह सामग्री सूची जो जानना  बहुत ही आसान है ! उसके लिए बस आपको इस साईट पर आना होगा और आसानी से पढ़ कर जान सकते है ! और इसके अतिरिक्त यहाँ उसका प्रिंट भी लेने की सुविधा है ! 
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सामग्री सूची को प्रिंट करने के लिए 

सबसे पहले इस साईट को ओपन करते है ! और उसके लेबल में जाकर उस सामग्री सूची पर क्लिक करते है ! तो आपके सामने अनेक सामग्री सूची की सूची आयेगी और उसके निचे read more नाम का एक विकल्प मिलेगा ऐसी होगी सूची का क्रम उसमे जाकर आप मकानों की नीव पूजन सामग्री सूची पर क्लिक करेगें ! या साईट में दहनी तरफ एक Serch box नाम का विकल्प मिलेगा वहाँ पर आप हिंदी में (मकानों की नीव पूजन सामग्री सूची ) को  टाइप करेगें और कंप्यूटर के की -बोर्ड से एंटर की प्रेस करेगें तो आपके सामने यह पेज डिस्प्ले होगा या कैसे भी आपके सामने यह पेज खुल जाये तो आप इस सूची को प्राप्त करना चाहते है ! आपके सामने दो विकल्प  होगे !

1. आप इस सामग्री सूची को प्रिंट कर सकते है    
2. आप इस सामग्री सूची को देखना 



आप एक नोट बुक लेकर लिख सकते है आपके लिए यही उपयुक्त होता है की काम जल्दी हो इसलिए आप इसे प्रिंट कर सकते है उसके लिए आगे प्रकिया ऐसी होगी की निचे जो मकानों की नीव पूजन सामग्री सूची  है उस पर आप माउस ले जायेगें तो आपके  स्क्रीन पर एक नया छोटा सा बटन आएगा बटन का रंग लाल होगा ! वह मकानों की नीव पूजन सामग्री सूची के ऊपर की तरफ बाई ओर होगा  उस पर लिखा होगा  P save  उस पर आप क्लिक करेगें तो आपके सामने एक न्यू विंडो ओपन होगी जिसमे विकल्प होगे की आप फेस बूक से लोग इन हो या ई -मेल से लोग इन होकर आपके सामने एक पेज डिस्प्ले होगा जिसमे आप प्रिंट भी कर सकते है !जो केवल मकानों की नीव पूजन सामग्री सूची  ही प्रिंट होगी अन्य कुछ भी प्रिंट नहीं होगाजो कार्य आप कर सकते है !

             
SEO, SHARMAPLUS RAMESH KUMAR
         

आगे हम इस सामग्री सूचि को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार हम अलग -अलग भाषा में देखते है !




 यह बिल्कुल आसान है जब इस सामग्री सूची को ओपन करते है तो पेज के दहनी तरफ एक ट्रांसलेट का बटन लगा हुआ है उस पर क्लिक करके अलग -अलग भाषा में सामग्री सूची को देख सकते है लेकिन ऊपर लिखी हुई  सामग्री सूची तो प्रिंट करने के लिए है उसकी तो भाषा बदलाव नहीं होगा निचे है वो आप देख सकते है अलग - अलग भाषा में !
         




मकानों की नीव पूजन सामग्री सूची

                                                                                                                                                     




रोली - 1                                            अगरबती - 1 पैकिट 
नाल 2                                           रुई - 50 ग्राम
चावल - 500 ग्राम                                   गुड पाव
लाल कपड़ा – 1 मीटर सूती                             चीनी- 100 ग्राम
सफेद कपड़ा- 1 मीटर सूती                             दुध - 100 ग्राम   
लोंग 10 ग्राम                                      ताम्बा का दक्कन- 1
इलायची- 20 ग्राम                                    नागरपान -7
सुपारी - 8                                           सात जगह की मिट्टी-
जनेऊ – 8                                          सात प्रकार का अनाज- 500
पंचरत्न -1                                          दही  - 100 ग्राम
बिदाम गिरी - 100 ग्राम                               घी - 100 ग्राम
पिस्ता (साबुत) - 100  ग्राम                           सात जगह की मिट्टी-
किसमिस- 100 ग्राम                                  लोहे का सीरया सवा 8 इंच
नारियल - 3                                          साँप सपनी- 1
माचिस- 1                                           शैवाल-
शहद- 1                                              सरसों का तेल-
बर्फी - 500 ग्राम                                        सिंदूर - 1
लड्डू- 500 ग्राम                                        कलश- 1
फूल माला- 1                                           दो घड़ - 1
केला- 1 किलो                                          सराई - 5 
सेव - 1 किलो                                          डोबला- 2
ताम्बा की गड्डी - 1                                 
मूंग-पाव                                           
चांदी का सिक्का- 1                                  
अमर बेल-                                          
गेहूँ -                                   
                                                                                                                                                  
                                                         
SEO , SHARMAPLUS RAMESH KUAMR
                    
   ऊपर जो इमेज है उसमे मकानों के क्षेत्र का नक्शा बताया गया है ! और उसके चार कोने है प्रत्येक कोने में दिशाओं को दर्ज किया गया है और मकान के कोंनसे कोने में पूजन किया जाये इसका पता तो विद्वान (पंडित जी ) समय के अनुसार बताता है ! क्योकि समय के अनुसार तो शुभ मुहर्त के लिए मकान का कोना बदलता रहता है ! एक विचार से यह भी होता है की मन लो की मकानों की नीव का शुभ मुहर्त आज दोपहर १२.१५ पर है ! तो सही यही रहता है की आज सुबह ही जल्दी मुहर्त निकलवाले  और मान लो की उत्तर पर्व वाला कोना मुहर्त में शुभ माना जाता है ! 



चरु कैसे बनाते है  

तो मुहर्त निकलवाने  के तुरंत बाद की पहते तो उपर लिखी हुई पूरी पूजा सामग्री ले आवे और फिर वह जो कोना शुभ निकलता है उस कोने में नीव खोदना शुरू कर दे और पंडित जी को भी सही समय पर बुला ले ताकि सही समय पर ही वो अपना सारा काम तैयार कर ले फिर सही समय से ही उस कोने से नीव शुरू हो सके !  फिर तो और इसमे जो कारीगर आता है मकान में चिनाई करने के लिए जो  ओजारों जैसे - हथोड़ा , करनी आदि की भी पूजा की जाती है और पांच पत्थर जो शुरू में लगाये जाते है उसकी भी पूजा की जाती है ! 
आगे इस पोस्ट में यह प्रशन आता है की कोंनसे दिन पर मकानों के कोंनसे कोने में शुभ मुहर्त और कोंनसे समय पर आता है ! उसकी पूरी जानकारी फिर कभी मै आगे की पोस्ट में दूँगा ! आशा करता हूँ की यह पोस्ट आपको जरूर ही पसंद आई होगी ! और  यह पोस्ट आपको कैसी लगी  फिर भी पोस्ट के  बारे  में आपके मन  में कोई सवाल आता है तो जरूर ही कोमेंट करे !                                                                                                

      



      

                                          

 

                                                                           






बिंदायक जी की कहानी

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बिंदायक जी की कहानी  के बारे में आज जानकारी करेगे ! हिंदू  धर्म में बिंदायक जी को बहुत ही महत्व पूर्ण मानते है ! और वास्तव में भी ऐसा ही है ! यह तो भगवन गणेश जी है ! हिंदू धर्म के लोग तो सर्व प्रथम गणेश जी भगवन को ही मानते है ! और यह सही है ! ऐसा ही होना चाहिए वो हो रहा है !

कब - कब क्या - क्या करते है -
जैसा की हम देखते है की एक दुकानदार होता है ! वह सुबह - सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करके जब वह अपनी दुकान में जाता है और सबसे पहले दुकान को खोलकर सफाई करता है और दुकानदारी करने से पहले दुकान में पूजा - पाठ भी करता है ! तब भी वह सबसे पहले भगवन गणेश जी की ही पूजा करता है ! फिर और कोई पूजा करता है ! फिर अपना आसन ग्रहण करके दुकान को चलता है ! इस तरह से कई प्रकार के पूजा पाठ होते ही रहते है वो भी हर एक दिन भगवन गणेश जी तो हर कार्य में सर्व प्रथम ही मनाया जाता है ! और कोई भजन का भी कार्य क्रम होता है तो भी सबसे पहले गणेश जी को ही मानते है ! और भगवन गणेश जी के कई नाम है ! जैसे - गजाननं , लम्बोदर आदि !

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चरु कैसे बनाते है  

अब आगे बिन्दायक जी की कहानी को पढेगे और कहानी के बारे में भी जानेगे ! हमारे बहुत से मित्रों ने हमें यही कहा की आप बिन्दायक जी की कहानी के बारे में एक पोस्ट लिखो ! जिससे हमें यह जानकारी नेट के माधयम से मिल सके और हम कही भी उसको नेट के द्वारा पढ़ सके ! तो इसमे कोई कठिनाई की बात नहीं है ! यह कहानी तो इस साईट पर पढ़ने के लिए बहुत ही आसान है ! क्योकि कहानी पूरी इस पोस्ट में लिखी हुई है ! जैसे ही हमारे दोस्त हम से कहते है वही पोस्ट मै लिख देता है !


                                                   
SEO , sharmaplus ramesh kumar









                                                       बिंदायक जी की कहानी

एक बार एक पुराने समय की बात है एक बार एक अंधी  बूढ़ी अम्मा ही रहती थी ! उस बुड्ढी अम्मा के एक बेटा था और एक बेटे की बहू थी ! वह बुड्ढी अम्मा और उसके बेटे और उसके बेटे की बहू बहुत ही गरीब थे!वह बूढ़ी अम्मा रोज श्री गणेश जी भगवान की पूजा करती थी!श्री गणेश जी भगवान उसे रोज कहते थे कि तुम कुछ मांगो!बूढ़ी अम्मा कहतीमैं क्या मांगू! मुझे तो कुछ मांगना आता ही नहीं!तब  गणेश जी भगवान बोलते!जा अपने बेटे और बेटे की बहू से पूछ आकि क्या मांगू!

जब भी वह अपने बेटे से पूछे तो बेटा बोला मां धन मांग ले और बहू से पूछा तो वह बोली पोता मांग ले!तब बुढ़िया ने सोचा कि ये दोनों तो मतलब के लिए मांग करते हैं! क्यों न मैं अपनी पड़ोसन के घर जाकर पूछ लो कि हमें गणेश जी महाराज से वरदान मांगने के लिए कह रहे हैं ! और मैं क्या वरदान मांगा जो हमारे लिए उचित होगा ! आप मुझे बताइए !
 पड़ोसन बोली तुम धन भी मत मांगो पोता भी मत मांगो आपका जीवन थोड़े ही दिनों का है !इसलिए तुम्हें दीदा- घोल मांग लो!घर आकर बुढ़िया ने सोचा कि बेटे-बहू राजी हुए वह मांगे और अपने लिए भी मांगना चाहिए !

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दूसरे दिन गणेश जी महाराज आए बोले कि कुछ मांगो तो है बुढ़िया माई बोली दीदा घोल दे-सोने के कटोरे में पोते को मैं दूध पीते देखो-अमर सुहाग दे- निरोगी काया दे- भाई, भतीजा ने सारा परिवार में सुख दे -मोक्ष दे !
श्री गणेश जी भगवान बोले कि हे बुढ़िया माई तूने तो हमारे पास सब कुछ ही मांग लिया !

परंतु ठीक है ! आप जैसा चाहोगी वैसा ही हो जायेगा ! ऐसा कहकर श्री गणेश जी भगवान अंतर्ध्यान हो गए ! बुढ़िया माई के सब कुछ ठीक हो गया हे गणेश जी महाराज जैसा बुढ़िया माई को दिया वैसा सबको देना !

                                                !!   समाप्त   !!


           
                                             


पन्द्रहाड़ी सामग्री सूची

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आज हम जानेगे की पन्द्रहाड़ी के दिन जो भी पूजा के लिए सामान की आवश्यकता होती है ! तो उसके लिए हमारे काफी दोस्तों ने यह पोस्ट शेयर करने के लिए हमें कहा तो इस लिए मैं आज यह पोस्ट कर रहा हूँ ! जो की बहुत से लोगो के लिए उपयोगी है !   उसकी जानकारी प्राप्त करेगें !  उससे पहले रामायण पाठ सामग्रीसूची , व  फेरे का सामान सामग्री सूची और अन्य सामग्री सूची (Samgri Suchi) की जानकारी शेयर कर चूका हूँ ! यह सामग्री सूची जो जानना  बहुत ही आसान है ! उसके लिए बस आपको इस साईट पर आना होगा और आसानी से पढ़ कर जान सकते है ! और इसके अतिरिक्त यहाँ उसका प्रिंट भी लेने की सुविधा है ! 
यह भी जाने - 


सामग्री सूची को प्रिंट करने के लिए 

सबसे पहले इस साईट को ओपन करते है ! और उसके लेबल में जाकर उस सामग्री सूची पर क्लिक करते है ! तो आपके सामने अनेक सामग्री सूची की सूची आयेगी और उसके निचे read more नाम का एक विकल्प मिलेगा ऐसी होगी सूची का क्रम उसमे जाकर आप पन्द्रहाड़ी के सामान की सामग्री सूची पर क्लिक करेगें ! या साईट में दहनी तरफ एक Serch box नाम का विकल्प मिलेगा वहाँ पर आप हिंदी में (पन्द्रहाड़ी के सामान की सामग्री सूची) को  टाइप करेगें और कंप्यूटर के की -बोर्ड से एंटर की प्रेस करेगें तो आपके सामने यह पेज डिस्प्ले होगा या कैसे भी आपके सामने यह पेज खुल जाये तो आप इस सूची को प्राप्त करना चाहते है ! आपके सामने दो विकल्प  होगे !

1. आप इस सामग्री सूची को प्रिंट कर सकते है    
2. आप इस सामग्री सूची को देखना 

आप एक नोट बुक लेकर लिख सकते है आपके लिए यही उपयुक्त होता है की काम जल्दी हो इसलिए आप इसे प्रिंट कर सकते है उसके लिए आगे प्रकिया ऐसी होगी की निचे जो पन्द्रहाड़ी के सामान की सामग्री सूची है उस पर आप माउस ले जायेगें तो आपके  स्क्रीन पर एक नया छोटा सा बटन आएगा बटन का रंग लाल होगा ! वह पन्द्रहाड़ी के सामान की सामग्री सूची के ऊपर की तरफ बाई ओर होगा  उस पर लिखा होगा  P save  उस पर आप क्लिक करेगें तो आपके सामने एक न्यू विंडो ओपन होगी जिसमे विकल्प होगे की आप फेस बूक से लोग इन हो या ई -मेल से लोग इन होकर आपके सामने एक पेज डिस्प्ले होगा जिसमे आप प्रिंट भी कर सकते है !जो केवल पन्द्रहाड़ी के सामान की सामग्री सूची ही प्रिंट होगीअन्य कुछ भी प्रिंट नहीं होगाजो कार्य आप कर सकते है !

                   
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यह भी जाने - 
    आगे हम इस सामग्री सूची  को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार हम अलग -अलग भाषा में देखते है !
 यह बिल्कुल आसान है जब इस सामग्री सूची को ओपन करते है तो पेज के दहनी तरफ एक ट्रांसलेट का बटन लगा हुआ है उस पर क्लिक करके अलग -अलग भाषा में सामग्री सूची को देख सकते है लेकिन ऊपर लिखी हुई ! सामग्री सूची तो प्रिंट करने के लिए है उसकी तो भाषा बदलाव नहीं होगा निचे है ! वो आप देख सकते है अलग - अलग भाषा में !
  

         पन्द्रहाड़ी के सामान की सामग्री सूची           

सूती खादी कपड़ा - 3 मीटर                                         पाँचौं  कपड़ा  चप्पल
चाय - 250 ग्राम                                                         चीनी - 1 किलों
चावल 1 किलों                                                           शक्कर - 1 किलों
तेल - 1 किलों                                                             घी - 1 किलों
बर्फी - 500 ग्राम                                                         दाल - 1 किलों
साबुन दो प्रकार के - 1 +1                                            माचिस - 1
केला- 1 किलों                                                            ऋतु फल - 1 किलों
लाल मिर्च (पीसी हुई ) - 100 ग्राम                               हल्दी (पीसी हुई ) - 100 ग्राम
धनियाँ - 100 ग्राम                                                     जीरा - 100 ग्राम
दही - 100 ग्राम                                                         पीतल की भगुनी - 1
ताम्बा की गड्डी - 1                                                   कलश - 2
मटका - 1                                                                 करी - 6
डोबला (मटका के ढक्कन ) -1
                                                                                                                                              

यह पन्द्रहाड़ी के सामान की पूरी Samgri Suchi अब है ! सामग्री सूची में जो करी - 6 लिखी हुई है ! उसका छ माही के लिए किया जाता है ! यहाँ पर पन्द्रहाड़ी और छ माही दोनों एक साथ हो जाती है ! आज कल सभी लोग ही ऐसा करते है ! और वैसे भी मै उपयोगी सामग्री सूची ही लिखता हूँ !  आपकी बारी यह बताने की यह पोस्ट आपको कैसी लगी ! और कोई आपके मन में सवाल आता है तो हमें comment जरुर करे ! हम आपके  comment  का जबाब जरुर देगें !