आरती जय जगदीश हरे - sharmaplus

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आरती जय जगदीश हरे

                               

                             आरती जय जगदीश हरे


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आरती जय जगदीश हरे अनेक धार्मिक कार्यों में प्रयोग  जाता  है - जैसे व्रत करते है ! तब भी प्रयोग होता है ! रामायण पाठ करने के बाद रामायण जी की आरती करने के बाद भी यह आरती जय जगदीश हरे की आरती का प्रयोग होता है ! या अन्य कोई छोटा हवन का कार्यक्रम होता है उसमे भी यह आरती का प्रयोग होता है ! और मंदिरों में भी सुबह - शाम  को आरती होती है ! उसमे भी अधिकतर यह आरती जय जगदीश हरे की आरती का ही प्रयोग होता है ! इस प्रकार कुल मिलकर कहना है की यह आरती सब धार्मिक कार्यों में उपयोग की जाती है !

                                   मंत्र


कर्पूर गौरम करूणाव तारम संसार सारम भुजगेन्द्र हारम |
सदा वसंतम हृदयार विंदे, भवं  भवानी सहितं  नमामि ||


आरती से पहले यह ऊपर लिखा हुआ मंत्र जरुर बोले ! क्योकि पंडित होते है ! वह यह मंत्र जरुर बोलते है ! उसी के अनुसार यह मंत्र बोलना चाहिए ! यह बहुत अच्छा रहेगा ! कुछ लोग इस मंत्र को आरती के बाद भी बोलने में प्रयोग करते है !



आरती जय जगदीश हरे


ॐ जय जगदीश हरे  स्वामी जय जगदीश हरे !
 भक्त जनों के संकट 
संत  जनों के संकट  छिन  में   दूर   करे !!

ॐ जय जगदीश हरे  स्वामी जय जगदीश हरे !

जो ध्यावे  फल   पावे  दू ख  बिनसे  मनका 
स्वामी दू ख  बिनसे  मनका !
सुख - सम्पति घर आवे 
सुख - सम्पति घर आवे कष्ट  मिटे   तनका !!

ॐ जय जगदीश हरे  स्वामी जय जगदीश हरे !

मात - पिता तुम मेरे  शरण गहूँ     किसकी
स्वामी शरण गहूँ  किसकी !
तुम   बिन और न दूजा 
प्रभु  बिन और न दूजा आस  करूँ    किसकी !!

ॐ जय जगदीश हरे  स्वामी जय जगदीश हरे !

तुम पूरण   परमात्मा    तुम     अन्तर्यामी 
स्वामी   तुम     अन्तर्यामी !
पार ब्राम्हा  परमेश्वर  
पार ब्राम्हा  परमेश्वर   तुम   सबके  स्वामी !!


ॐ जय जगदीश हरे  स्वामी जय जगदीश हरे !


तुम करुणा के सागर  तुम    पालन    कर्ता 
स्वामी तुम    पालन    कर्ता !
मै मूरख  खल  कामी  

मै सेवक तुम स्वामी क्रपा  करो     भर्ता !! 

ॐ जय जगदीश हरे  स्वामी जय जगदीश हरे !

तुम हो  एक अगोचर   सबके   प्राण    पति 
स्वामी  सबके   प्राण    पति  !
किस बिधि मिलूँ दयामय  
किस बिधि मिलूँ दयामय  मैं  तुमको कुमति !!

ॐ जय जगदीश हरे  स्वामी जय जगदीश हरे !

दीन बंधु  दुखहर्ता    तुम    रक्षक     मेरे 
स्वामी तुम ठाकुर मेरे !
करुणा हस्त उठाओ  
करुणा हस्त उठाओ  द्वार   पड़ा       तेरे !!

ॐ जय जगदीश हरे  स्वामी जय जगदीश हरे !

विषय विकार मिटाओ    पाप   हरो   देवा 
स्वामी कष्ट हरो देवा !
श्रदा भक्ति बढ़ाओ    
श्रदा प्रेम  बढ़ाओ    संतन   की    सेवा !!

ॐ जय जगदीश हरे  स्वामी जय जगदीश हरे !

श्याम सुन्दर जी की आरती जो कोई नर गावे
स्वामी जो कोई नर गावे !
कहत शिवानंद स्वामी  
 कहत शिवानंद स्वामी  परम   पद    पावे !!

ॐ जय जगदीश हरे  स्वामी जय जगदीश हरे !

             !! समाप्त !!