आरती हनुमान जी की - sharmaplus

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आरती हनुमान जी की


             आरती हनुमान जी की 

bhagwaan




हिंदू धर्म में तो लोग बहुत ही धार्मिक कार्यों में लगे होते है ! बहुत से लोग तो भगवान की भक्ति करते है !  श्री हनुमान जी महाराज को बालाजी महाराज के नाम से भी जाने जाते है ! आम आदमी तो यही कहता है की चलो बालाजी के मंदिर में अधिक्तर बच्चे ही हनुमान की भक्ति में लीन रहते है ! वे बालाजी के मंदिर में जाते है ! और भगवान से यही आराधना करते है ! की हमें सफलता मिले इतना ही नहीं बल्कि रोज - रोज बालाजी के मंदिर में जाते है और सुंदर कांड का पाठ , हनुमान चालीसा का पाठ भी और हनुमान जी की आरती भी करते है !  इस प्रकार वे भगवान को प्रसन्न करने में लगे रहते है ! वो बहुत अच्छी बात है ! की उनकी आदते भी सुधरती है ! जैस - की वो सुबह जल्दी उठते है ! जल्दी ही स्नान आदि कार्य करते है ! वो उसके स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है ! और दूसरी तरफ भगवान भी उनसे प्रसन्न होता है !



इसके अतिरिक्त ये भी लाभ होता है ! की हनुमान जी महाराज को प्रसन्न करने के लिए बहुत से प्रयास करते है ! कहते है ! की भगवान की भक्ति सच्चे मन से होनी चाहिये ! उसके लिए क्या - क्या करना होता है ! अपना मन भगवान में लगा दे ! उसके लिए सत्य बोलना बड़ा धर्म होता है ! वह आदत झूठ बोलने की भी उनसे दूर होती है ! और किसी दूसरे जीव को न सताना सदा अच्छे कर्म करते रहना ऐसी आदते भगवान की भक्ति की प्राथमिकता होती है ! वह भी मनुष्य के लिए अच्छी होती है ! कुल मिलकर कहना यह होगा की भगवान की भक्ति में लाभ ही होता है !
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श्री हनुमान जी की आरती करने से पहले ये मंत्र भी जरूर बोले -

कर्पूर गौरं करुणाव तारं , संसार सारं भुजगेन्द्र हारम्  !
सदा वसंतं हृदयारविन्दे , भवं भवानी सहितं नमामि !!

   !! श्री हनुमान जी की आरती !!


आरती      कीजै      हनुमान      लला   की !
दुष्ट    दलन      रघुनाथ       कला     की !!

जाके     बल      से       गिरिवर     काँपे !
रोग  - दोष  जाके   निकट      न      झाँपै !!

आरती    कीजै      हनुमान     लला    की !
दुष्ट    दलन     रघुनाथ    कला         की !!

अंजनी     पुत्र      महा            बलदाई !
संतन     के       प्रभु       सदा    सहाई !!

आरती    कीजै     हनुमान     लाला    की !
दुष्ट      दलन     रघुनाथ   कला     की !!





दे       बीरा       रघुनाथ         पठाये !
लंका      जरि      सिय    सुधि    लाये !!

आरती     कीजै      हनुमान     लाला  की !
दुष्ट       दलन     रघुनाथ    कला    की !!

लंका     सो   कोट    समुद्र     सी    खाई !
जात  पवन    सूत    बार      न     लाई !!

आरती    कीजै     हनुमान    लाला     की !
दुष्ट      दलन     रघुनाथ    कला     की !!

लंका       जारि       असुर         संहारे !
सिया    रामजी    के     काज      सँवारे !!

आरती   कीजै    हनुमान     लाला    की !  
दुष्ट    दलन     रघुनाथ     कला    की !!

लक्ष्मण मूर्छित           पड़े       संकारे !
आनि          सजीवन     प्रान    उबारे !!

आरती  कीजै       हनुमान    लाला    की !
दुष्ट   दलन    रघुनाथ    कला       की !!

पैठि   पताल    तोरि      जम  -   कारे !
अहिरावण   की        भुजा       उखारे !!

आरती  कीजै   हनुमान  लला        की !
दुष्ट  दलन   रघुनाथ     कला        की !!

बायें      भुजा     असुर     दल   मारे !
दहिने    भुजा    संत     जन     तारे !!

आरती  कीजै    हनुमान  लाला      की !
दुष्ट  दलन   रघुनाथा   कला       की !!

सुर     नर   मुनि    आरती     उतारे !
जै    जै     जै     हनुमान     उचारे !!

आरती    कीजै   हनुमान   लला    की !
दुष्ट     दलन   रघुनाथ   कला    की !!

कंचन   थार     कपूर     लौ      छाई !
आरती    करत        अंजना      माई !!

आरती    कीजै    हनुमान    लाला  की !
दुष्ट     दलन   रघुनाथ     कला   की !!

जो  हनुमान  जी    की   आरती    गावै !
बसि    बैकुंठ    परम     पद     पावै  !!  

आरती   कीजै   हनुमान   लला      की !

दुष्ट    दलन    रघुनाथ    कला    की !!

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