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नव रात्रा कैसे करते है



           नव रात्रा कैसे करते है

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                  नव रात्रा कैसे करते है 
नव रात्रा कैसे करते है ! आज उसकी पूरी जानकारी प्राप्त करेंगें जैसे की आज नव रात्रा है ! इसलिए आज ही नव रात्रा का पहला दिन है ! हमारे हिंदू धर्म में यह देखने को मिलता है ! नव रात्रा हर एक घर में नव रात्रा के दिन दुर्गा माँ की पूजा होती है ! नव रात्रा के दिन घर -घर में कोई ना कोई आदमी व्रत -उपवास रखता है ! वो भी माँ दुर्गा की पूजा के लिए जिससे माँ उस पर कृपा करे ! और नव रात्रा वर्ष में दो बार आता है एक बार तो चैत्र मास में दूसरी बार आश्विनी मास में दोनों ही मासों एक जैसे ही 




पूजा होती है ! नव रात्रा के दिन हर घर में दुर्गा माता की पूजा बड़ी धूम - धाम करते है और नव रात्रा में दुर्गा पूजा का विशेष महत्व होता है व सप्त शती का पाठ भी करना चाहिए ! 

क्या -क्या बाते का ध्यान रखना चाहिए नव रात्रा के दिन -
नव रात्रा के दिन जो भी भी बाते ध्यान में रखनी होती है ! वह तो एक दम सीधी ही बाते है एक सीधी सी बात यह है ! की अपना आचरण सही रहना चाहिए ! सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर लेवे और इस नवरात्रा करने वालो को झूठ नहीं बोलना चाहिए और दूसरे को कोई प्रकार से पीड़ा नहीं पहुंचानी चाहिए ! व समय व शुभ मुहर्त का भी ध्यान रखना चाहिए जिससे की पूजा सही समय पर शुरू हो सके नव रात्रा की स्थापना कैसे की जाये उसके लिए जिस कमरे में नव रात्रा की स्थापना की जा रही है ! उस कमरे को पहले अच्छी तरह से साफ कर ले या कमरे की सफाई कर ले और किस दिशा में स्थापित किया जाये उसके लिए तो यह तो हर साल बदलते रहते है ! और तारों के अनुसार ही पूर्व दिशा या  पश्चिम दिशा में करे  उसी की अनुसार की दिशा का पता चलता है ! और शुभ मुहर्त भी ऐसे ही बदलता रहता है ! वो भी समय आने पर पता चल जाता है !
                                                               

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कोनसे दिन किस माता की पूजा होती है -
नव रात्रा में ९  दिन तक ९ देवी माताओं की पूजा होती है जो की निम्न प्रकार से है -
पहले दिन जिस माता की पूजा होती है वह है शैल पुत्री अथार्त पहले दिन शैल पुत्री नामक माता की पूजा होती है !
दूसरे दिन जिस माता की पूजा होती है वह है ब्रहा चारणी अथार्त दूसरे दिन ब्रहा चारणी नामक माता की पूजा होती है !
तीसरे दिन जिस माता की पूजा होती है वह है चन्द्र घंटा अथार्त तीसरे दिन चन्द्र घंटा नामक देवी की पूजा होती है !
चौथे दिन जिस माता की पूजा होती है वह है कुष्मांडा अथार्त चौथे दिन  कुष्मांडा नामक माता की पूजा होती है !
पाँचवे दिन जिस माता की पूजा होती है वह है स्कन्द अथार्त पाँचवे दिन स्कन्द नामक माता की पूजा होती है !
छटवें दिन जिस माता की पूजा होती है वह है कात्यायनी अथार्त छटवें दिन कात्यायनी नामक माता की पूजा होती है !
सातवें दिन जिस माता की पूजा होती है वह है काल रात्री अथार्त सातवें दिन काल रात्री नामक माता की पूजा होती है !
आठवें दिन जिस माता की पूजा होती है वह है महा गौरी  अथार्त आठवें दिन  महा गौरी नामक माता की पूजा होती है !
नवें दिन जिस माता की पूजा होती है वह है  सिद्धिदात्री अथार्त नवे दिन सिद्धिदात्री नामक माता की पूजा होती है ! 





नव रात्रा या दीपावली के दिन किसी भी शुभ अवसर पर घर में तुलसी जी  का पेड़ लगाना चाहिए ! और उसके पास प्रति दिन सांय काल घी का दीपक जलना चाहिए ऐसा करने पर घर में सुख शांति बनी रहेंगी अथवा प्रभावित दंपति से भी सुख शांति बनी रहेंगी ! 
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नव रात्रा के दिन घर में माता का दरबार सजाया जाता है और माता का घट को स्थापित किया 

जाता है ! माता के पास  जौ - ज्वारे उगाए जाते है जिसको रोज पानी से सींचा जाता है ! माता के 

दरबार में ९ दिन - रात तक अखंड दीपक जलाया जाता है ! और दूसरा दीपक माता के सामने जोत 
लेने के लिए जलाया जाता है ! प्रति दिन सुबह जल्दी से उठकर स्नान आदि करने के बाद माता की 
पूजा - पाठ करके माता की जोत ली जाती है ! जिसमे माता को भोग लगाया जाता है ! 

कोनसे दिन किस माता को भोग लगते है तथा भोग में क्या लगते है उसकी जानकारी निम्न प्रकार से है -

पहले दिन जिस माता  को घी का भोग लगाया जाता है !
दूसरे दिन जिस माता को शक्कर का भोग लगाया जाता है ! 
तीसरे दिन जिस माता को दुध का भोग लगाया जाता है !
चौथे दिन जिस माता को माल पुआ का भोग लगाया जाता है ! 
पाँचवे दिन जिस माता को केला का भोग लगाया जाता है ! 
छटवें दिन जिस माता को शहद का भोग लगाया जाता है ! 
सातवें दिन जिस माता को गुड़ का भोग लगाया जाता है ! 
आठवें दिन जिस माता को नारियल का भोग लगाया जाता है 
नवें दिन जिस माता  को काले तिल का भोग लगाया जाता है ! 
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नव रात्रा में बहुत से लोग व्रत - उपवास आदि करते है ! और माता के भक्त होते है वो भी नव रात्रा में व्रत उपवास करते है सम्पूर्ण नव रात्रा निराहार रहकर या फिर ऐसा ना हो तो अन्न का छोड़कर करना कई लोग तो पहले और अन्तिम दिन निराहार रहकर भी करते है ! नव रात्रा में एक समय भोजन कर और बाकि समय में दुध फल आदि खा कर भी उपवास रख सकते है ! और वह मिठाई भी ले सकते है जिसमे अन्न ना हो वह मिठाई तो बाजार से लाते है ! उसकी अपेक्षा तो अपने घर पर ही बनाकर ले लेवे ! क्योकि घर से बनी मिठाई में अन्न का मिलावटी  नहीं होगी  और शुद्ता भी अच्छी रहेंगी !  अब यह बताने की आपकी बारी है की यह पोस्ट कैंसी लगी और अच्छी लगे तो पोस्ट को शेयर करे ! और यदि आपके  मन में कोई सवाल हो तो कोमेन्ट भी करे !