पंच भीखू की कहानी - sharmaplus

Breaking

is web site se pandito ke karyo aur dharmik karyo ki puri jankari hindi me milti hai.

Featured Post

पंच भीखू की कहानी


                   पंच भीखू की कहानी 
PANCH BHIKHU KI KAHANI


पंच भीखू की कहानी को पढ़ने के लिए आप बिलकुल सही जगह पर आये है ! तो आप यहाँ से पढ़ सकते है ! हमारे हिंदू - धर्म में बहुत से  लोग व्रत - उपवास करते है ! तो उसको बहुत सी कथाएँ सुनते है या फिर पढते है ! फिर उस लोगों को सहायता देने के लिए यह पोस्ट मेने लिखी है ! और हमारे बहुत से दोस्तों ने हमसे कहा की आप पंच भीखू की कहानी की पोस्ट शेयर करे ! इससे पहले मै  बिंदायक जी की कहानी और वृहस्पति देव की कहानी को पहले से ही शेयर कर चूका हूँ ! 


आगे इस पोस्ट में हम पंच भीखू की कहानी की जानकारी प्राप्त करते है ! यह कहानी तो कार्तिक  
के महीने में ज्यदा कर औरतें ही कहती है और सुनती है ! उसके लिए यह पोस्ट तो बहुत अच्छी है ! और यह  भी जरुरी नहीं है ! की औरतें ही इस कहानी को पढ़े बल्कि कोई भी पढ़ सकता है ! पंच भीखू देव के बारे में बहुत ही चमत्कार की कहानी है ! वैसे भी हम सभी ही जानते है ! की मनुष्य भगवान की भक्ति सच्चे मन से करता है ! तो भगवान उसको फल भी जरुर ही देता है ! इस कहानी में अज्ञानी राजा के साथ क्या हुआ उसकी जानकारी भी है ! आखिर राजा को भी मानना पड़ा की भगवान चमत्कारी देवता होता है ! ऐसी कहानियों को यदि सही तरीके से पढ़ा जाता है ! तो सही ज्ञान प्राप्त होता है ! आप पढते रहे ! और मै आज की तरह सदा ही ऐसे धार्मिक सहायता के लिए  पोस्ट करता रहूँगा !



                                                  !! पंच भीखू की कहानी !!

एक बार एक गांव में एक साहूकार रहता था ! उस साहूकार का एक बेटा था ! और बहु थी ! वह बहु  काफी समय से सुबह जल्दी उठकर रोजाना गंगा में स्नान करने के लिए जाया करती थी ! और उसकी एक विशेषता  थी ! कि वह किसी भी पराया पुरुष का मूह  नहीं देखती थी !

और वहां गंगा नदी में एक राजा भी काफी दिनों से ही जल्दी उठकर रोजाना गंगा में स्नान करने जाया करता था !  एक  दिन राजा ने सोचा कि मैं इतने दिनों से गंगा में स्नान करता आया हूं ! पर राजा सोचा  मेरे पहले आकर इस गंगा में कुल स्नान करता है !

आप यह भी पढ़े - 

रामायण पाठ सामग्री सूची

फेरे के लिए सामग्री सूची

  वेदी कैसे बनाये  

वृहस्पति वार व्रत कथा

जब पांच  दिन कार्तिक  के शेष  रह गए ! तो  उस दिन वह साहु कार की बहू गंगा जी में स्नान करने के लिए जा रही थी !  लेकिन  उस वक्त राजा का आना हो गया ! राजा की आवाज सुनकर साहु कार की बहू वहाँ  से जल्दी - जल्दी जाने लगी !  तो जल्दी - बाजी में उसे साहूकार की बहू की माला - मोचड़ी वहां पर छूट गई थी ! फिर क्या हुआ राजा का वहाँ आना हुआ !

तो राजा ने अपने मन में यह विचार किया  यह माला - मोचड़ी कितनी सुंदर है ! तो हो सकता है ! की उसको पहनने  वाली औरतें कितनी सुंदर होगी ! यह सोच -विचार कर राजा ने अपनी सारी नगरी में यह घोषणा करवा दिया ! जिसकी भी यह  माला - मोचड़ी  है !

 वह मेरे पास पांच  दिन तक आवेगी !  उसके बाद ही उसकी माला - मोचड़ी उसको दूंगा अथार्त जब ही उसकी माला - मोचड़ी लोटाउंगा !   साहूकार की  बहु  ने  भी यह कहलवा दिया कि मैं पांच  दिन  तक आउंगी ! लेकिन किसी को साख भरने के लिए बैठा देना ! अथार्त साख भरने  व्यवस्था करवा देना !

राजा गंगा जी के पास एक बिछावना  लगाकर सुवा (तोता ) को पिंजरे में डाल दिया और वहाँ टांक दिया और स्वयं बैठ गया !  साहूकार की  बहु  आई और पहली सीढी में पैर रखी  तब वह बोली  कार्तिक -ठाकुर - राय  दामोदर - पांचो पांडू - छटो  नारायण - भीमस वह  राजा उस पापी को नींद आ जावे !

आप यह भी पढ़े - 

नारायण बली सामग्री सूची

चरु कैसे बनाते है  

मकानों की नीव पूजन सामग्री सूची

नव रात्रा कैसे करते है


तब उस  पापी राजा को नींद आ गई ! वह साहूकार की  बहु   जल्दी ही गंगा जी में स्नान करने जाने लगी !  तो वह सुवा (तोता ) को बोली सुवा - सुवटा - गल घलूंगी हार - साख भरो मेरे बीरा ! तब सुवा बोला कि साख तो कोई बीरा नहीं भरते है !  तो वह साहूकार के बेटे की पत्नी "बीरा " शब्द के स्थान पर  देवर  शब्द का प्रयोग किया !  तभी सुबह बोला भाभी साख  भरूंगा ! वह  तो यह कह कर चली गई !  राजा हड़बड़ाकर उठा तो सुवा से बोला - क्या वह औरत  आई थी और वह किसकी थी !

तो वह सुवा  बोला  आभा की सी  बिजली - होली  की सी झली - केला की कामडी - गुलाब जैसे रंग तब राजा ने सोचा कि आज मैं अपनी अंगुली को चीर कर बैठ जाऊं तो नींद नहीं आएगी ! यह राजा ने सोच और  दूसरे दिन अपनी अंगुली को चीर लिया ! वह साहूकार की  बहु आई ! और पहले की तरह राजा को नींद लाने के लिए प्रार्थना की ! तो राजा को नींद आ गई !  और वह गंगा में स्नान करने जाने लगी तो सुवा  ने साख भर दिया !  राजा ने उस सुवा से पूछा पहले की तरह सुवा ने भी  पहले की तरह जवाब दे दिया !

राजा ने सोचा कि आज मैं अपनी आंखों में मिर्ची डाल दूंगा !  तो मुझे नींद नहीं आएगी तब वह आंख में मिर्ची डाल दिया !  वह साहूकार की  बहु  आई पहले की तरह से प्रार्थना की कि राजा को नींद आवे !
 और ऐसा ही हुआ राजा को नींद आ गई ! और वह सुवा से साख भरवा  कर चली गई गंगा स्नान करने के लिए ! राजा उठा तो सुवा से पहले की तरह से  पूछा तो सुवा भी राजा को पहले की तरह जबाब दिया !

 राजा अगले दिन फूल कांटे बिछा कर बैठ गया !  वह साहूकार की  बहु आई  और पहले की तरह से प्रार्थना की !  कि राजा को नींद आ जावे तो राजा को नींद आ गई ! राजा उठा तो सुवा से पहले की तरह से  पूछा तो सुवा भी राजा को पहले की तरह जबाब दिया !  राजा को पांचवें दिन राजा आग  की अंगीठी पर बैठ गया !  वह साहूकार की  बहु  आई प्रार्थना की कि आज मेरा सत् रखनी है !  तो उस  राजा को नींद आ गई और सुवा साख भर दिया और वह गंगा स्नान से सुवा से कहकर गई !  उस पापी राजा को कह देना अब मेरे पांच दिन पूरा हो गया है !  मेरी  माला - मोचड़ी मुझे लौटा देना !

और आगे क्या हुआ की कुछ ही दिनों के बाद एक राजा को कोढ़ निकल आया !  तो वह राजा त्राहि-त्राहि करने लगा !  तब ब्राह्मण को बुलाया और कहा की मेरे ये क्या हो गया तब ब्राह्मण बोला -  कि कोई पतिव्रता स्त्री का पाप आपको लग गया है !  तब वह राजा ने पूछा तो  कैसे ठीक होगा ! तो ब्राह्मण बोला -  आप उसे धर्म की बहन बना लो और उसके स्नान किये हुए जल से आप  स्नान करो !

आप यह भी पढ़े - 

नव रात्रा का पाँचवा दिन स्कंद माता

नव रात्रा का सातवें दिन काल रात्री

आरती जय जगदीश हरे

हनुमान चालीसा   

 जिससे आपकी यह बीमारी दूर हो  जाएगी ! राजा उसका  माला - मोचड़ी लेकर उस साहूकार के घर गया ! और साहूकार से बोला -  यह माला - मोचड़ी आपके   बहु  गंगा जी पर भूल गई थी ! यह उसे दे देना !  और राजा  यह भी बोला कि उसका स्नान किया हुआ जल भी हमें  हमें देना !  तब साहूकार ने बोला -  वह तो किसी पराए पुरुष का मूह  नहीं देखती है !

आप नाली  के नीचे बैठ जाओ जब वह स्नान करेगी तब नीचे स्नान किया हुआ जल आएगा तब आप वो जल ले लेना ! राजा नाली  के नीचे बैठ गया ! और उसका स्नान किया  हुआ जल अपनी काया  को धो  दिया तो उसका कोढ़ रोग मिट गया ! हे पंच भीखू देवता साहूकार के बेटे   की पत्नी  की सत् आपने रखी है वैसे ही सब की  सत् रखना है !
                                                        !! पंच भीखू कहानी समाप्त !!

आपको यह कहानी वाली पोस्ट जरूर ही पसंद आई होगीं ! और इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे ! और फिर भी आपके मन में कोई इस पोस्ट में कोई सवाल आता है ! तो वह नीचे कोमेंट बॉक्स में कोमेंट कीजिये !