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बिंदायक जी की कहानी


             बिंदायक जी की कहानी 


बिंदायक जी की कहानी  के बारे में आज जानकारी करेगे ! हिंदू  धर्म में बिंदायक जी को बहुत ही महत्व पूर्ण मानते है ! और वास्तव में भी ऐसा ही है ! यह तो भगवन गणेश जी है ! हिंदू धर्म के लोग तो सर्व प्रथम गणेश जी भगवन को ही मानते है ! और यह सही है ! ऐसा ही होना चाहिए वो हो रहा है !


kahani




कब - कब क्या - क्या करते है -
जैसा की हम देखते है की एक दुकानदार होता है ! वह सुबह - सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करके जब वह अपनी दुकान में जाता है और सबसे पहले दुकान को खोलकर सफाई करता है और दुकानदारी करने से पहले दुकान में पूजा - पाठ भी करता है ! तब भी वह सबसे पहले भगवन गणेश जी की ही पूजा करता है ! फिर और कोई पूजा करता है ! फिर अपना आसन ग्रहण करके दुकान को चलता है ! इस तरह से कई प्रकार के पूजा पाठ होते ही रहते है वो भी हर एक दिन भगवन गणेश जी तो हर कार्य में सर्व प्रथम ही मनाया जाता है ! और कोई भजन का भी कार्य क्रम होता है तो भी सबसे पहले गणेश जी को ही मानते है ! और भगवन गणेश जी के कई नाम है ! जैसे - गजाननं , लम्बोदर आदि !

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अब आगे बिन्दायक जी की कहानी को पढेगे और कहानी के बारे में भी जानेगे ! हमारे बहुत से मित्रों ने हमें यही कहा की आप बिन्दायक जी की कहानी के बारे में एक पोस्ट लिखो ! जिससे हमें यह जानकारी नेट के माधयम से मिल सके और हम कही भी उसको नेट के द्वारा पढ़ सके ! तो इसमे कोई कठिनाई की बात नहीं है ! यह कहानी तो इस साईट पर पढ़ने के लिए बहुत ही आसान है ! क्योकि कहानी पूरी इस पोस्ट में लिखी हुई है ! जैसे ही हमारे दोस्त हम से कहते है वही पोस्ट मै लिख देता है !


                                                 



                                                       बिंदायक जी की कहानी

एक बार एक पुराने समय की बात है एक बार एक अंधी  बूढ़ी अम्मा ही रहती थी ! उस बुड्ढी अम्मा के एक बेटा था और एक बेटे की बहू थी ! वह बुड्ढी अम्मा और उसके बेटे और उसके बेटे की बहू बहुत ही गरीब थे!वह बूढ़ी अम्मा रोज श्री गणेश जी भगवान की पूजा करती थी!श्री गणेश जी भगवान उसे रोज कहते थे कि तुम कुछ मांगो!बूढ़ी अम्मा कहतीमैं क्या मांगू! मुझे तो कुछ मांगना आता ही नहीं!तब  गणेश जी भगवान बोलते!जा अपने बेटे और बेटे की बहू से पूछ आकि क्या मांगू!

जब भी वह अपने बेटे से पूछे तो बेटा बोला मां धन मांग ले और बहू से पूछा तो वह बोली पोता मांग ले!तब बुढ़िया ने सोचा कि ये दोनों तो मतलब के लिए मांग करते हैं! क्यों न मैं अपनी पड़ोसन के घर जाकर पूछ लो कि हमें गणेश जी महाराज से वरदान मांगने के लिए कह रहे हैं ! और मैं क्या वरदान मांगा जो हमारे लिए उचित होगा ! आप मुझे बताइए !
 पड़ोसन बोली तुम धन भी मत मांगो पोता भी मत मांगो आपका जीवन थोड़े ही दिनों का है !इसलिए तुम्हें दीदा- घोल मांग लो!घर आकर बुढ़िया ने सोचा कि बेटे-बहू राजी हुए वह मांगे और अपने लिए भी मांगना चाहिए !

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दूसरे दिन गणेश जी महाराज आए बोले कि कुछ मांगो तो है बुढ़िया माई बोली दीदा घोल दे-सोने के कटोरे में पोते को मैं दूध पीते देखो-अमर सुहाग दे- निरोगी काया दे- भाई, भतीजा ने सारा परिवार में सुख दे -मोक्ष दे !
श्री गणेश जी भगवान बोले कि हे बुढ़िया माई तूने तो हमारे पास सब कुछ ही मांग लिया !

परंतु ठीक है ! आप जैसा चाहोगी वैसा ही हो जायेगा ! ऐसा कहकर श्री गणेश जी भगवान अंतर्ध्यान हो गए ! बुढ़िया माई के सब कुछ ठीक हो गया हे गणेश जी महाराज जैसा बुढ़िया माई को दिया वैसा सबको देना !

                                                !!   समाप्त   !!