नागपंचमी की कथा - sharmaplus

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नागपंचमी की कथा


                        नाग पंचमी  





SHARMAPLUS NAG PANCHAMI



नागपंचमी यह सावन के महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आती है ! यह महीना भगवान शिव का ही आता है !  नाग पंचमी एक  त्यौहार है ! क्योकि इस महीने में भगवान शिव की ही पूजा होती है ! यह पूरा महीना भक्तो के लिए खास है !  नागपंचमी  के दिन नाग देवता को शिव भगवान के मंदिर में जो नाग देवता की प्रतिमा होती है ! उस पर दुध और फूल व चावल आदि को समर्पित करके इसकी पूजा की जाती है ! यह पुरे देश भर में मनाया जाने वाला त्यौहार है !







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                                    नाग पंचमी  की कथा प्रारम्भ 

एक बार एक समय की बात है !  एक बार एक साहूकार था !  उसके सात  पुत्र थे ! और सात  बहू थी !
 एक दिन वो सात  बहुएं कहीं से मिट्टी लेने के लिए गए ! तो मिट्टी खोदते समय एक सांप निकला छोटी बहू को छोड़कर सारी बहू उसे मारने लगे तब छोटी बहू ने उसे मारने नहीं दिया ! और वह सांप को धर्म भाई बना ली !  और बोली मेरी पीहर में बाम्बी में सांप है ! तब सारी बहु केवल छोटी को छोड़ कर बोली कल इसको छाणा लाने  के लिए किसको भेजेंगे ! उठते ही भेजेंगे तो सांप  इसको डस लेगा !

दूसरे दिन छोटी बहू छाणा  लेने गई तो वहां पर सांप बैठा था ! और उसे देखकर सांप ने फुफकार मारी ! तो छोटी बहू जल्दी-जल्दी बोली भाई राम राम !  सांप ने कहा कि आपने मुझे भाई बोल दिया नहीं तो मैं आपको डस लेता ! तब वह बोली सांप आप तो मेरे धर्म भाई हो तो मुझे कैसे डस लोगे !  और वह बोली कि  जीवो  नाग  नागोलिया, जीवो बासु की नाग,  जिवो  मेरे लाड - लड़ाइयो , नेवर घाली पाँव !

तब सांप ने उसे नेवर दिया और वह नेवर पहनकर अपने घर गई !  तब उसकी जेठानिया बोली सांप  ने इसको डसा  ही नहीं है ! और थोड़ी देर के बाद सांप उसे लेने के लिए आया ! और सांप बोला मेरी बहन को भेजो तब जेठानिया बोली अपने तो  पिहर में अपना भाई हमें लेने के लिए नहीं आया करता है !  और इसको तो पीहर भी नहीं है ! तो इसका धर्म भाई इसको लेने आ गया है ! तो उसको वहां पर उसके  सिर - मेहंदी  करके भेज दी !  वे  दोनों आ रहे  है !  रास्ते में खून की नदी बहती मिलती है ! तो वह  धर्म बहन बोली में नदी कैसे पार करूंगी ! तब उसका भाई सांप बोला तुम मेरी पूछ पकड़ ले !  जैसे ही वे दोनों  वही जाने लगी तो वह नदी दूध की हो गई !  और पीहर आते ही सब उसके साथ लाड - चाव  करने लगे !

और पीहर  में रहते  काफी दिन हो गए !  एक दिन सांप  की मां बोली मैं तो कहीं बाहर जा रही हूं ! आप अपने भाइयों को दूध ठंडा करके दे देना  तो वह उसे  गर्म गर्म दूध पिला दिया तो किसी का फन  जल गया !  और किसी की पुछ जल गई !  एक दिन उसके पड़ोसन से लड़ाई कर दी !  तब वह बोली मेरे बाड़े में भाइयों की सौगंध और भाई सुन लिया ! और अपनी मां  से बोला  बहन को पीहर में रहते काफी दिन हो गए उसे  ससुराल भेज दो ! तब उसको वहां हर कोई बहुत सा धन देने लगा ! तो ताई चाची बोली भाई तेरा तो बहुत लाड - चाव किया है !   परंतु  तुमको छ :   कोठी की ताली तो दी है !  सातवें कोठे  की ताली नहीं दी है !  तब वह सांप से बोली की सातवें कोठे  की तली  क्यों नहीं दी !

तब सांप बोला की सातवें कोठे की ताली को लेकर  बहुत पछताएगी !  वह जिद्द करके सातवें कोठे की ताली ले ली और सातवे कोठे  को खोलकर देखे तो वहां एक बड़ा और बुडा  अजगर बैठा था !  वह उसको देख कर फुफकार  मारी तब वह बोली बापू जी राम राम !

 तक अजगर ने कहा तुम मुझे बापू जी कह दिया नहीं तो मैं आपको डस लेता ! तो वह बोली आप मेरे धर्म के पिता हो मुझे कैसे डस लोगें  जीवो  नाग  नागोलिया, जीवो बासु की नाग,  जिवो  मेरे लाड - लड़ाइयो नो  करोड़ का हार तभ नाग देवता ने हार  निकाल कर दे दिया ! वह बहुत धन-दौलत लेकर अपने ससुराल आ गई ! तब उसके जेठानिया कहने लगी हमारी तो पीहर है ! तो भी भाई - बाप  हमें धन नहीं दिया है !  इसकी तो पीहर भी नहीं तो भी वह बहुत सारा धन लेकर आई है !

दूसरे दिन उसके बच्चे  अनाज की बोरी में अनाज को बर्बाद कर रहे थे !  तब उसके ताई - चाची बोली तेरे नाना मामा तो अजरंगिया - बजरंगिय  है !  उसको कह दे  कि वह चांदी की अनाज की बोरी मांग ले हमारा तो अनाज बर्बाद मत करो ! बच्चों की यह बात अपनी मां को कहते हैं !  और सांप उसकी बात को सुन लिया और अपनी मां से सोना - चांदी के अनाज  की बोरी  अपनी बहन के रख दिया ! दूसरे दिन बच्चा झाड़ू बर्बाद करने लगे !  तब ताई - चाची बोली सांप से कह की उसको सोना - चांदी की झाड़ू बनाकर बच्चों को दे दे !  तब ताई बोली  इन बच्चों को कुछ भी मत बोलो नहीं तो उनका घर भी  धन से भर जाएगा !


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तब वह ताई बोली  हम तो राजा को जा कह  देंगे ! कि मेरी देवरानी  के पास नो करोड़ का हार है !  तो वह बिक जायेगा तो  तुम्हारी रानी के पास आ जावेगा ! और यह बात राजा को कहते ही  राजा ने उस साहूकार  के छोटे से छोटे बेटे की बहू को बुलाकर कहा कि वह हार मेरी रानी को दे दे !   और वह मन ही मन में बोले कि मेरे गले मे तो हार हो जावे !  और  रानी के गले में रव हो जावे ऐसा कहकर वो वहां से चली गई !  और रानी बैठे गले में हार पहनने लगे तो वो हार सांप  बनकर बैठ गया !  और उसे काटने लगा तो वह रानी चिल्लाईं ! और वह बोली उस साहूकार के छोटे से छोटे बेटे की बहू को बुलाओ ! और बोले कि तेरे गले में सांप निकला कर जादू - टोना कर गई !

राजा ने उस साहूकार की बेटी की बहू को बुलाया ! और बोला कि तुम मेरी रानी का क्या हाल कर दिया !  गले में जो सांप ही सांप हो गए हैं !  तब वह बोले कि मैं तो कुछ भी नहीं की  हूं !  मेरे पीहर तो नहीं है ! मैं तो सांप   को  भाई - भतीजा बनाया था ! वही हमें यह हार लाकर दिया है !   राजा ने उस का हार को उसे वापस दे दिया ! और एक  अपना हार भी उसको  दे दिया !  तब उसकी जेठानीयां फिर से बात करने लगी यह तो राजा  - रानी से भी नहीं डरती  है !  इसके बाद में जेठानी उसके आदमी सी बोली तेरी औरत तो किसी  सेठ से धन लाती है  ! आप उसे मना नहीं कर सकते हैं !

तो वह अपनी औरत से लड़ाई - झगड़ा करने लगा !  वह कहा कि इतना धन कहां से लाई हो !  तो वह बोली हम सातों  देवरानी - जेठानी  मिट्टी लाने गई ! तभी वहां एक सांप निकला तो वह उसे मारने लगी ! तब मैंने उसे मारने नहीं दिया !  और उसे अपना धर्म भाई बना लिया क्योंकि मेरे पीहर नहीं है ! तब वह सांप देवता ही यह धन लाकर दिया है ! फिर उसके बाद उसका आदमी पूरे गांव में सब को कह दिया !  कि नाग पंचमी के दिन हर कोई ठंडी रोटी खायेगा ! और कथा सुनेंगा ! और नाग देवता की पूजा करेंगा !  हे  नाग देवता जिसके पीहर नहीं था !  उसे उसे आप पीहर दिखाएं है !  ऐसे ही हम सब को दिखाएं !  नाग पंचमी के दिन यह कथा करनी चाहिए और सुननी चाहिए !
                                                         !! कथा समाप्त !!                                                 

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