नव रात्रा का नवां दिन सिद्धि दात्री - sharmaplus

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नव रात्रा का नवां दिन सिद्धि दात्री


नव रात्रा का नवां दिन सिद्धि दात्री



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          सिद्धि दात्री माता का मंत्र : -

  या देवी सर्व भू‍तेषु माँ सिद्धि दात्री रूपेण संस्थिता ।

  नमस्तस्यै  नमस्तस्यै  नमस्तस्यै  नमो  नम:  II






नव रात्रा में में नौ दिनों तक लोग व्रत - उपवास करते है ! ये सब माता दुर्गा की भक्ति से होते है ! माता दुर्गा देवी के नवें सवरूप का नाम सिद्धि दात्री है ! अथार्त यह माता सभी प्रकार की सिद्धि देने वाली है ! सिद्धियां मार्कण्डेय पुराणों के अनुसार आठ सिद्धियां होती है ! जो इस प्रकार से है - 
अणिमा , लघिमा , प्राप्ति , प्राकाम्य , ईशित्व ,व वशित्व , आदि होती है ! 

और ब्रह्मा वैवर्त पुराण के श्री कृष्ण जन्म खंड में इसकी संख्या अठारह बताई गई है ! इनके नाम निम्न है -
अणिमा , लघिमा , प्राप्ति ,प्राकाम्य , ईशित्व - वशित्व , दूर श्रवण , कल्पव्रक्ष , वाक सिद्धि , सबकामना वसयिता , सर्वज्ञत्व , परकाय प्रवेशन ,  सिद्धि , भावना , स्रष्टि , अमरत्व , संहारकरणसामर्थ्य , प्राप्ति , महिमा , सर्वन्यायकत्व ,

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माता दुर्गा की जो व्रत - उपासना करते है ! उसको माता दुर्गा ये अठारह  सिद्धियां देती है ! अथार्त माँ दुर्गा अपने साधक को ये  सिद्धियां देने में समर्थ है ! देवी पुराणों के अनुसार भगवान शिव ने इस माता की ही क्रपा से सभी प्रकार की  सिद्धियां प्राप्त हुई थी !

 इसकी अनुकंपा से भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ !  और आधा शरीर स्वंय  का इसी कारण से भगवान शिव लोंक में "अर्धनारीश्वर" के नाम से प्रसिद्ध हुए थे !  माता सिद्धिदात्री का वाहन शेर है !  इस माता के चार भुजाएं हैं !  यह माता कमल के पुष्प पर आसीन होती  है !  माता की ऊपरी दाहिने हाथ में गदा  है ! और दहने वाले  नीचे के  हाथ में चक्कर है !
 तथा माता की बायीं तरफ के  ऊपर के हाथ में कमल पुष्प है ! और बाए तरफ के  नीचे की हाथ में शंख है !


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 नवरात्र में व्रत - उपासना करने वाले साधक नवें  दिन नवरात्र पूजा में इस माता के इस सवरूप की  उपासना की जाती है ! इस नवें दिन  शास्त्र के अनुसार विधि -विधान से संपूर्ण निष्ठा के साथ सधना करने वाले साधक को सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती है ! 

माता की आगे  में कुछ भी माता के  आगें आगम्य  नहीं रह जाता ! और ब्रह्मांड पर  पूरी तरह से विजय प्राप्ति करने की क्षमता उसमें आ जाते हैं !  नवरात्रा करने वाले प्रत्येक साधक  को नवें  दिन माता सिद्धिदात्री की कृपा प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयत्न करते रहना चाहिए !  भक्त माता की आराधना की ओर अग्रसर हो !  माता सिद्धिदात्री की कृपा से अनन्त  दुःख रूप संसार  निल्रिप्त  होकर सारे सुखों का भोग करता हुआ मोक्ष को प्राप्त कर लेता है ! 

नवरात्र में नवदुर्गा में माता सिद्धिदात्री अंतिम माता है !  और अन्य आठ दुर्गाओं की पूजा - उपासना करते हुए ! साधक नवें  दिन माता सिद्धिदात्री की उपासना में प्रवत्त होते  हैं ! इसे सिद्धिदात्री माता की उपासना पूर्ण करने के बाद  भक्तों और साधकों की लौलिक -परलौलिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है !  और  माता सिद्धिदात्री  की कृपा से भगत के  ऊपर कोई ऐसी कामना नहीं रहती है ! जिसको पूरा करना चाहता है !  अथार्त  माता स्वयं ही  भक्तों की कामनाओं  को पूर्ण  कर देती है !

भक्त सभी सांसारिक इच्छाओं ,आवश्यकताओं और स्प्रहाओं  से ऊपर उठकर मानसिक रुप से माता भगवती के दिव्य लोकों में विचरण करता हुआ ! माता की कृपा से रस पीयूस का  निरंतर पान करता हुआ  आर विषय भोग शून्य  हो जाता है !  माता का परम  भक्त  माता का सर्वस्व  हो जाता है !  माता की कृपा से इस प्रकार की परम शक्ति प्राप्ति होती है ! 

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माता के चरणों में सानिध्य  प्राप्ति करने के लिए हमें निरंतर नियम के अनुसार रहकर माता की उपासना करनी चाहिए ! भगवती माता का स्मरण करने व ध्यान करने  और माता की पूजा करने से हमें इस संसार की असारता का बोध कराते हुए !  वास्तविक परम शांतिदायक अमृत पद  की ओर ले जाने वाला है !  इसलिए नवरात्रों  में नौ दिनो तक पूरा प्रयत्न  के साथ माता की उपासना करनी चाहिए !  इसे ही माता के सिद्धि प्राप्ति हो सकती हैं !  

नवरात्र में नवें  माता सिद्धिदात्री को काले तिल का भोग लगावे !  यही उतम होता है ! 

माता सिद्धि दात्री का ध्यान निम्न मंत्रो का उचारण करके किया जाता है - 

वन्दे   वांछित   मनोरथार्थ    चन्द्रार्घकृत   शेखराम् ।

कमलस्थितां   चतुर्भुजा    सिद्धी  दात्री   यशस्वनीम् ॥


स्वर्णा वर्णा  निर्वाण  चक्रस्थितां  नवम्  दुर्गा  त्रिनेत्राम् ।

शख,     चक्र,    गदा,     पदम,     धरां    सिद्धी  दात्री भजेम् ॥


पटाम्बर,     परिधानां  मृदु  हास्या नाना  लंकार भूषिताम् ।

मंजीर,    हार,     केयूर,    किंकिणि  रत्न कुण्डल  मण्डिताम् ॥


प्रफुल्ल   वदना पल्लवा  धरां कातं कपोला पीन पयोधराम् ।

कमनीयां   लावण्यां श्रीणकटि   निम्ननाभि  नितम्बनीम् ॥



माता सिद्धि दात्री का पाठ स्तोत्र निम्न मंत्रो का उचारण करके किया जाता है - 



कंचनाभा  शख  चक्र  गदा  पद्म   धरा  मुकुटोज्वलो ।

स्मेरमुखी  शिव   पत्नी   सिध्दिदात्री    नमोअस्तुते ॥


पटाम्बर     परिधानां    नाना    लंकारं     भूषिता ।

नलिस्थितां    नलनार्क्षी  सिद्धी   दात्री    नमोअस्तुते ॥


परमानंद      मयी     देवी    परब्रह्म    परमात्मा ।

परमशक्ति,    परमभक्ति,     सिध्दिदात्री     नमोअस्तुते ॥


विश्वकर्ती,         विश्वभती,            विश्वहर्ती,        विश्वप्रीता ।

विश्व   वार्चिता   विश्वातीता  सिध्दिदात्री  नमोअस्तुते ॥


भुक्ति     मुक्ति   कारिणी   भक्त  कष्ट   निवारिणी ।

भव   सागर    तारिणी     सिध्दिदात्री    नमोअस्तुते ॥


धर्मार्थ   काम     प्रदायिनी     महामोह    विनाशिनी ।

मोक्ष  दायिनी   सिद्धी  दायिनी सिध्दिदात्री  नमोअस्तुते ॥



एक बात और भी ध्यान में रखने की है जब कोई भी नव रात्रा के दिनों में व्रत - उपवास करते है ! तो उसको जरूर ही दुर्गा सप्त शती का पाठ करना चाहिए ऐसा करने से बाधाये भी दूर होती है ! अपने घर में सुख - शांति भी बनी रहती है और मनुष्य की मनो कामना भी पूरी होती है ! इस लिए यह सब जानकर जरुर ही दुर्गा सप्त शती का पाठ अवश्य ही करना चाहिए !


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